'सड़कों पर आंसू गैस के गोले, छात्रों पर पुलिस की लाठियां और दूसरी तरफ एसी मॉल में आराम से बर्गर खाते 'नेता जी'...' सोचकर ही अजीब लगता है न? लेकिन जंतर-मंतर पर नीट धांधली के खिलाफ चल रहे छात्रों के बड़े आंदोलन के बीच यही अजीबोगरीब नजारा हकीकत बन गया.
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पेपर लीक के खिलाफ उभरे बहुचर्चित डिजिटल और नागरिक आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने 21 जुलाई को अपने ही मुख्य प्रवक्ता विजेता दहियाको पार्टी के सभी पदों और जिम्मेदारियों से बर्खास्त कर दिया. वजह? 'चलो संसद' मार्च के दौरान बर्गर खाते हुए उनका एक वीडियो वायरल होना और उसके बाद उनका बेबाक (या कहें गैर-जिम्मेदाराना) रवैया! आखिर कौन हैं विजेता दहिया? क्यों एक बर्गर ने आंदोलन के इस बड़े चेहरे का करियर दांव पर लगा दिया? आइए जानते
हैं उनके बारे में.
कौन हैं विजेता दहिया?
तीन जून को जब CJP ने अपने मुख्य प्रवक्ताओं के नामों का ऐलान किया था, तो उसमें सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ विजेता दहिया का नाम भी शामिल था. वे आंदोलन के सबसे पढ़े-लिखे और रणनीतिक चेहरों में से एक माने जाते थे. वो देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में शुमार दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के पूर्व छात्र हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे देश के जाने-माने यूट्यूबर्स समेत कई बड़े कंटेंट क्रिएटर्स को पॉलिटिकल रिसर्च और राइटिंग सपोर्ट दे चुके हैं.
यही नहीं विजेता दहिया दो किताबों'To Hell With That Job' और 'Power of Universe' के लेखक हैं. इसके अलावा उन्होंने हरियाणवी फिल्में 'दरारें' और 'ऊपरी पराई' का लेखन व निर्देशन भी किया है.
'बर्गर कांड' और CJP की त्वरित कार्रवाई
20-21 जुलाई को जब CJP के आह्वान पर हजारों छात्र 'संसद घेराव' के लिए सड़कों पर उतरे, तो पुलिस ने उन पर वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. कई युवा घायल हुए. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें CJP के प्रवक्ता विजेता दहिया विरोध स्थल के पास एक मॉल में आराम से बर्गर खाते दिखे. लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि 'छात्र लाठियां खा रहे हैं और नेता जी कंबो मील का मजा ले रहे हैं!'
मामला बढ़ता देख CJP ने X (ट्विटर) पर आधिकारिक बयान जारी कर विजेता दहिया को पद से बर्खास्त कर दिया. CJP ने लिखा:
'हम अपने प्रवक्ता विजेता दहिया के इस बेहद संवेदनहीन व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. जब हमारे साथी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी पुलिस की बर्बरता झेल रहे थे, तब ऐसा व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य और हमारी विचारधारा के खिलाफ है.'
बोले- 'हां, मैं बर्गर खाऊंगा!'
बर्खास्ती और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बाद विजेता दहिया ने बैकफुट पर जाने या माफी मांगने के बजाय इंस्टाग्राम पर एक और वीडियो जारी किया. और मजेदार बात यह कि वे उस वीडियो में भी बर्गर खाते ही नजर आए!
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मैं बर्गर क्यों खा रहा हूं? यह आज देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है! भाई, इंसान बर्गर कब खाता है? जब उसे भूख लगती है. तुमने मुझे कोई चुनाव जिताकर नेता नहीं बनाया है जो मैं तुम्हें जवाब दूं. Yes, I will eat the burger! हालांकि, उन्होंने वीडियो के कैप्शन में मजाकिया लहजे में यह भी लिख दिया कि 'वैसे मैदा और ट्रांसफैट्स की वजह से मैंने वह बर्गर पूरा नहीं खाया था!'
वैसे किसी भी बड़े नागरिक या छात्र आंदोलन में जब नेता ज़मीन के दर्द से कटकर 'लापरवाह' दिखने लगते हैं, तो नुकसान आंदोलन का ही होता है. CJP ने तुरंत कार्रवाई करके यह संदेश देने की कोशिश तो की है कि उनके लिए छात्रों का संघर्ष किसी नेता की सुविधा से बड़ा है. लेकिन विजेता दहिया का यह 'बर्गर विवाद' युवाओं को यह सीख जरूर दे गया कि सार्वजनिक जीवन में टाइमिंग, संवेदनशीलता और ऑन-ग्राउंड मौजूदगी ही आपकी असली पहचान बनाती है.
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